इन वास्तु टिप्स से तय करें दिन की शुरूआत, मिलेगा सभी परेशानियों से छुटकारा

गोरखपुर: मानव जीवन को सहज बनाने के लिए प्राचीन ऋषि-मुनियों ने कई ऐसे उपाय खोज निकाले थे, जिन्हें अपने जीवन में शामिल कर सामान्य जीवन की कई परेशानियों से छुटकारा पाया जा सकता है।

वास्तुशास्त्र उन्हीं उपायों में से एक है, जिसके सिद्धांत पूर्णत: विज्ञान और तर्कों पर ही आधारित हैं। ऐसा कहना इसलिए जरूरी है क्योंकि आज की पीढ़ी प्राचीन विद्याओं को ज्यादा महत्व नहीं देती, तब तक जब तक कि उनका संबंध विज्ञान से ना हो।

वास्तुशास्त्र का विज्ञान हमारे आसपास मौजूद ऊर्जाओं के आधार पर संचालित होता है। इसके अंतर्गत नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक में परिवर्तित कर मानव जीवन की परेशानियों को सुलझाने की कोशिश की जाती है।

 

पिछले कई आलेखों में हम आपको वास्तुशास्त्र के ऐसे कई टिप्स दे चुके हैं जिनके आधार पर आप अपने घर और ऑफिस में मौजूद नकारात्मक ऊर्जाओं से छुटकारा पा सकते हैं।

आज हम आपको इनसे थोड़ा हटकर कुछ ऐसा बताने जा रहे हैं, जो इन सबसे हटकर आपकी दिनचर्या निर्धारित कर सकता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार कौन सा काम दिन के किस समय करना चाहिए ये भी उल्लेखित है…..

  • वास्तुशास्त्र के अंतर्गत मध्यरात्रि का समय चीजों को छिपाकर रखने के लिए उत्तम माना गया है। मध्य रात 12 बजे से लेकर दोपहर 3 बजे तक के समय को गोपनीय माना गया है, इस समय सूर्य पृथ्वी के उत्तर दिशा में होता है। इसलिए अगर कोई सामान छिपाकर रखना चाहते हैं तो उसके लिए यह समय और दिशा सर्वोत्तम है।

 

  • सूर्योदय से पहले यानि 3 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक का काल ब्रह्ममुहूर्त माना गया है। इस समय सूर्य, पृथ्वी के उत्तर-पूर्वी भाग में होता है। यह समय चिंतन-मनन और पढ़ाई के लिए सबसे बेहतर माना गया है। सुबह 6 से लेकर 9 बजे तक सूर्य, पृथ्वी के पूर्वी हिस्से में होता है। घर बनाते या खरीदते समय इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि इस दौरान सूर्य की रोशनी घर में अवश्य प्रवेश करती हो।

 

  • भोजन पकाने के लिए सुबह 9 बजे से लेकर दोपहर 12 बजे तक का समय सर्वोत्तम है। इस समय सूरज, पृथ्वी के दक्षिण-पूर्व में होता है। सामान्यतौर पर रसोई और बाथरूम गीले रहते हैं, इसलिए इन्हें कुछ ऐसे स्थापित करना चाहिए जहां सूरज की पर्याप्त रोशनी पहुंचती हो। तभी यहां का वातावरण स्वस्थ रह सकता है।

 

  • दोपहर 12 से लेकर 3 बजे तक सूर्य पृथ्वी के दक्षिण भाग में होता है। इस समय को विश्रांति यानि आराम का समय कहा जाता है। आराम कक्ष ऐसी जगह स्थापित होना चाहिए जहां 12 से 3 बजे के बीच में सूरज की रोशनी आराम से पहुंचती हो। दोपहर 3 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक का समय अध्ययन संबंधी कार्यों के लिए उत्तम होता है। इस समय सूर्य दक्षिण-पश्चिमी भाग में होता है। इसलिए इस दिशा पर स्टडी रूम या लाइब्रेरी होना अच्छा है।

 

  • शाम 6 बजे से लेकर रात 9 बजे के दौरान सूर्य पश्चिम में होता है, इस समय पढ़ाई, खान-पान आदि से जुड़े काम इस बीच पूरे कर लेने चाहिए। रात नौ बजे के बाद सूर्य की दिशा उत्तर-पश्चिम में होती है, यह समय शयन काल कहा जाता है। बेडरूम उत्तर-पश्चिम दिशा में होंगे तो मानसिक शांति भी मिलेगी और नींद भी अच्छी आएगी। दांपत्य जीवन में मधुरता बनाए रखने में भी घर के उत्तर-पश्चिमी कोने का बेडरूम अच्छा माना गया है।

 

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। हमारा उदृेश्य इस लेख के माध्यम से मात्र आपको सूचना पहुंचाना है। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।