‘निर्भया’ के बाद अब मनीष गुप्ता हत्याकांड के दोषियों को सजा दिलाएंगी सुप्रीम कोर्ट की वकील ‘सीमा समृद्धि’, गोरखपुर से दिल्ली ट्रांसफर कराएंगी केस

गोरखपुर: कानपुर प्रापर्टी डीलर मनीष गुप्ता के सनसनीखेज हत्याकांड का मामला अब गोरखपुर से दिल्ली ट्रांसफर हो सकता है। पुलिस की पिटाई से मनीष की मौत के बाद उसे इंसाफ दिलाने की जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट की सबसे चर्चित मशहूर वकील सीमा समृद्धि ने ली है। इसकी पुष्टि खुद मृतक मनीष की पत्नी मीनाक्षी ने की है। सीमा अब हाथरस मनीष हत्याकांड मामले में केस लड़ेंगी, वह भी बिना फीस लिए। इसके लिए वह मनीष के परिवार से बात भी कर चुकी हैं। संभवत: आज सोमवार को वह इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी भी देंगी।

 

‘निर्भया’ के दोषियों को दिला चुकीं हैं फांसी

बता दें कि सीमा समृद्धि कुशवाहा ने निर्भया केस भी लड़ा था और अंत में चारों दरिंदों (मुकेश सिंह, अक्षय सिंह ठाकुर, पवन कुमार गुप्ता और विनय कुमार शर्मा) को 20 मार्च 2020 को फांसी दिलाई थी। यह सच है कि दिल्ली के निर्भया कांड में सीमा समृद्धि के प्रयासों के चलते ही चारों दोषियों को फांसी मिल सकी थी। ऐसे में अगर वो इस मामले को हाथ में लेती हैं, तो मनीष को न्याय मिलने की उम्मीद और बढ़ जाएगी।

 

बिना फीस लिए केस लड़ेंगी सीमा

मृतक मनीष के परिवार के मुताबिक सीमा समृद्धि बिना कोई फीस लिए मनीष हत्या कांड मामले का केस लड़ेंगीं। पीड़ित परिवार को इंसाफ़ दिलाने के लिए सीमा कुशवाहा ने इस केस को लड़ने की इच्छा भी जताई है। जबकि आज वे इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील भी कर सकती हैं।

कौन हैं सीमा समृद्धि?

निर्भया को इंसाफ दिलाने और दोषियों को फांसी दिलाने में सुप्रीम कोर्ट की वकील सीमा समृद्धि की बड़ी भूमिका थी। वह केस की शुरुआत से ही निर्भया की माता-पिता की वकील रही। सीमा समृद्धि ने सुप्रीम कोर्ट में रातभर दलीलें रखकर निर्भया के दोषियों को 20 मार्च की सुबह फांसी दिलाई थी। वह निर्भया ज्योति ट्रस्ट में कानूनी सलाहकार भी हैं। देश के नामी शिक्षण संस्थानों में से एक दिल्ली विश्वविद्यालय से शिक्षा हासिल करने वालीं सीमा ने 2014 में सुप्रीम कोर्ट में वकालत शुरू की थी। वह 24 जनवरी, 2014 को निर्भया ज्योति ट्रस्ट से जुड़ीं। इसके बाद से वह लगातार इससे जुड़ी हुई हैं। इसके साथ ही वे हाथरेप रेप कांड, उन्नाव गैंग रेप सहित कई चर्चित केसों को लड़ने का एलान कर चुकीं हैं।

ऐसे ट्रांसफर होगा केस

दरअसल, भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता यानी धारा 406 के तहत सुप्रीम कोर्ट को यह अधिकार है कि वह किसी केस या अपील को एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर कर सकता है। धारा 406 के अनुसार जब भी सुप्रीम कोर्ट को यह प्रतीत करवाया जाता है कि न्याय के उद्देश्य के लिए यह समीचीन है कि इस धारा के तहत आदेश किया जाए तो सुप्रीम कोर्ट किसी विशेष मामले या अपील को एक हाईकोर्ट से दूसरे हाईकोर्ट या किसी हाईकोर्ट के अधीनस्थ आपराधिक न्यायालय से दूसरे हाईकोर्ट के अधीनस्थ आपराधिक न्यायालय में स्थानांतरित करने का निर्देश दे सकता है। धारा 406 आगे कहती है कि सुप्रीम कोर्ट भारत के एटोर्नी जनरल या हितबद्ध पक्षकार के आवेदन पर ही इस धार के तहत कार्य कर सकता है। अगर यह आवेदन एटोर्नी जनरल नहीं दे रहे हैं और कोई पक्षकार दे रहा है तो पक्षकार को इस आवेदन के साथ एक शपथ पत्र लगाना होगा।

पीड़ित परिवार में गोरखपुर पुलिस का खौफ

वहीं, 27 सितंबर की रात मनीष गुप्ता हत्याकांड कांड के बाद गोरखपुर पुलिस पर तमाम सवाल खड़े हुए थे। जबकि मृतक की पत्नी मीनाक्षी गुप्ता ने साफ तौर पर यह कहा था कि उन्हें गोरखपुर पुलिस पर जरा भी भरोसा नहीं है। मीनाक्षी की मांगों को पूरा करते हुए सीएम योगी ने इस मामले की जांच कानपुर SIT को सौंप दी। SIT फिलहाल मामले की जांच कर रही है। लेकिन पीड़ित परिवार और घटना के बाद मनीष के साथ मौजूद उनके दोस्तों में इस कदर खौफ हो गया है कि वह किसी भी हाल में गोरखपुर आने को तैयार नहीं हैं। हालांकि SIT मनीष के दोस्तों संग होटल के रूम नंबर 512 का सीन रिक्रिएशन कराना चाहती है, लेकिन वह आने को तैयार नहीं हुए। उधर, इस मामले में हत्यारोपी बनाए गए रामगढ़ताल थाने के इंस्पेक्टर जेएन सिंह सहित 6 पुलिस वालों को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, कानपुर के प्रापर्टी डीलर मनीष गुप्ता अपने दोस्तों के साथ गोरखपुर घुमने आए थे। वे रामगढ़ताल इलाके के होटल कृष्णा पैलेस में ठहरे थे। 27 सितंबर की देर रात गोरखपुर के होटल में पुलिस वालों पर मनीष को पीट-पीटकर मारने का आरोप लगा। इसके बाद 28 सितंबर को पोस्टमॉर्टम के बाद 6 पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या की FIR हुई और सभी को सस्पेंड किया गया। 29 सितंबर की सुबह परिजन शव लेकर कानपुर पहुंचे। सीएम से मिलने की जिद पर अड़े थे। अंतिम संस्कार करने से भी इनकार किया। 30 सितंबर को प्रशासन के आश्वासन के बाद सुबह 5 बजे मनीष का अंतिम संस्कार किया गया। फिर उसी दिन सीएम ने मनीष की पत्नी से मुलाकात की। इसके बाद से इस मामले की जांच  कर रही है। जबकि गोरखपुर पुलिस सभी 6 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।