अब पराली जलाना पड़ेगा भारी, जुर्माने के साथ हो सकती है जेल

गोरखपुर: राष्ट्रीय हरित अभिकरण, हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन के बाद कृषि अवशिष्ट या फसल अवशेष को खेत में जलाने की कुप्रथा प्रदेश सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। धान की पराली या फसल अवशेष खेत में जलाए जाने पर किसान भाईयों को 2 एकड़ से कम से कम पर 2500 और 2 एकड़ से अधिक एवं 5 एकड़ वाले किसान पर 15000 रुपये प्रति घटना तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है। 

फसल अवशेष को जलाने से रोकने के लिए प्रदेश सरकार ने कम्बाइन हार्वेस्ट के साथ स्ट्रा रीपर विथ बाइन्डर अथवा स्ट्रा रीपर का प्रयोग अनिवार्य कर दिया गया है। स्ट्रा रीपर मशीन के बिना कम्बाइन प्रयोग करने वाले कम्बाइन मालिकों के विरूद्ध भी पूर्व की तरह इस बार भी एफआईआर दर्ज करने के साथ कम्बाइन मशीन जब्त करने की चेतावनी दी गई है। इस साल प्रदेश सरकार ने कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रा मैनेजमेन्ट सिस्टम, स्ट्रारीपर, स्ट्रारेक एवं बेलर न होने पर फसल अवशेष प्रबंधन के अन्य वैकल्पिक यन्त्र यथा मल्चर, पैडी स्ट्राचापर, श्रब मास्टर, रोटरी स्लेशर, रिवर्सिबल एमबी प्लाउ का प्रयोग कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ किए जाने की अनुमति दी है। 

अण्डरटेकिंग के बाद कम्बाइन संचालन की अनुमति

कम्बाइन मालिक द्वारा यह विश्वास दिलाए जाने पर वे फसल अवशेष का उचित प्रबंधन करेंगे उन्हें कृषि विभाग के संचालन की अनुमति दी जा रही है। सीडीओ इंद्रजीत सिंह कहते हैं कि कम्बाइन हार्वेस्टर के संचालक की जिम्मेदारी होगी कि कटाई के दौरान फसल अवशेष प्रबंधन सुनिश्चित करेंगे। यन्त्रों का प्रयोग न करने एवं पराली जलाए जाने पर कम्बाइन हार्वेस्टर स्वामी एवं किसान के खिलाफ होगी कार्रवाई।

बना सकते हैं खाद

पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था हेरिटेज फाउंडेशन के ट्रस्टी नरेंद्र कुमार मिश्र कहते हैं कि कृषि अवशिष्ट या फसल अवशेष से कम्पोस्ट बना कर किसान अपने खेतों में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके खेत में जिवांश मात्रा बढ़ेगी और उत्पादन भी बढ़ेगा। इसके लिए खेत में पड़े अवशेष को नमी की स्थिति में 20-25 किलोग्राम यूरिया प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करके मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई करें। फसल अवशेष सड़कर खाद बन जाएगा। 

पर्यावरण के साथ मृद्रा स्वास्थ्य भी प्रभावित

जिला कृषि रक्षा अधिकारी संजय यादव ने बताया कि फसल अवशेष जलाने से वातावरण प्रदूषित होता ही है। मिट्टी के पोषक तत्वों की अत्यधिक क्षति एवं मिट्टी के भौतिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। फसल अवशेष जलाने से मृदा ताप में बढ़ोत्तरी होती है। इस कारण वातावरण पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। फसल अवशेषों की लाभदायक मित्र कीट जल कर मर जाते है। पशुओं के चारे की व्यवस्था में कमी आती है। आबादी में अग्निकाण्ड होने की संभावना बनी रहती है।

गठित की गई हैं कमेटियां

डीएम के विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि पराली जलाने की वारदातों की रोकथाम के लिए विकास खण्ड एवं तहसील स्तर पर उड़न दस्ता गठित है। तहसील स्तरीय सचल दस्ता में नामित अधिकारी तहसीलदार, उप सम्भागीय कृषि अधिकारी और थानाध्यक्ष शामिल हैं। पर्यवेक्षीय अधिकारी उप जिलाधिकारी करेंगे। विकास खण्ड स्तरीय सचल दस्ते में नायब तहसीलदार,कानूनगो, सहायक विकास अधिकारी (कृषि) और थानाध्यक्ष हैं। पर्यवेक्षीय अधिकारी खण्ड विकास अधिकारी होंगे।

10 ग्राम पंचायतों को मिला 40 लाख अनुदान

उप निदेशक कृषि संजय सिंह ने बताया कि 10 ग्राम पंचायतों को 40 लाख रुपये अनुदान पर दिए गए हैं। ये ग्राम पंचायते क्रमश एक लाख रुपये ग्राम पंचायत से लगाकर 5-5 लाख रुपये के फसल अवशेष प्रबंधन यंत्र खरीद रही हैं। इन यंत्रों को इस्तेमाल ग्राम पंचायत क्षेत्र के किसान फसल अवशेष प्रबंधन में करेंगे ताकि उन्हें पराली जलानी न पड़े।