नेपाल— मनोकामना मन्दिर: यहां पर्यटकों को लुभा रही आस्था के रंगों के बीच प्रकृति के अद्भुत नजारे

रिपोर्ट: रवि प्रताप सिंह

नेपाल: भारत के मित्र राष्ट्र नेपाल में यू तो पर्यटन के अनगिनत रंग है, हिमालय की विशाल पर्वत मालाओं से सजे नेपाल में हर कदम आंखों को सुकून देने वाले अद्भुत नजारे है। पहाड़ों से कल कल करते उतरती पहाड़ी नदीयों और बादलों को छुते पहाडों को देख मन प्रफुल्लित हो उठता है। नेपाल के आस्था और पर्यटन के चटख रंगों में से एक है मनोकामना मन्दिर, यह नेपालीजन के आस्था का दूसरा सबसे प्रमुख केन्द्र है।

देश—विदेश से आते हैं पर्यटक
नेपाल की राजधानी काठमाडू स्थित पशुपतिनाथ मन्दिर के बाद मनोकामना देवी मन्दिर दूसरा ऐसा मन्दिर है, जहां बड़ी संख्या में देेश—विदेश से श्रद्धालु व पर्यटक पहुंचते है। नेपाल के साथ साथ भारत से भी बडी संख्या में लोग माता मनोकामना देवी के दर्शन के लिए आते है। नवरात्र के नौ दिन यहां काफी भीड़ होती है। मनोकामना देवी मन्दिर में बडी संख्या में लोगों के पहुंचने का एक कारण यह भी है कि यहां आस्था के साथ साथ प्रकृति के बेहद खूबसूरत नजारे है।

यात्रा को और आकर्षक बनाता रोप-वे सफर
जो कि पर्यटकों के लिए खासा लोकप्रिय है। नेपाल के प्रमुख नदी त्रिशुली के ऊपर से उठती और पहाडों के शिखर तक चढती अत्याधुनिक रोप-वे सफर यात्रा को और भी आकर्षक बना देता है। ऊंची पहाडी के बीच बादलों के बीच से निकल कर हमारी रोप-वे कब मनोकामना देवी मन्दिर स्टेशन पहुंच गई पता ही नहीं चलता। यहां के रास्ते पहाड़ों से लुका-छुपी खेलते बादलों के अद्भुत नजारों को देख आंखो को जो सुकुन मिलता है। उसे शायद शब्दों में बया नहीं किया जा सकता।

इन रास्तों से जा सकते हैं मनोकामना मंदिर
नेपाल में आस्था और पर्यटन का इन मनोरम संगम को देखने के लिए सडक मार्ग से भारत की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा सोनौली (महराजगंज उत्तर प्रदेश) और ठूठीबारी (महराजगंज उत्तर प्रदेश) के रास्ते आसानी से पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा हवाई मार्ग से काडमाडू और पोखरा से भी मनोकामना पहुंचा जा सकता है। सोनौली बार्डर से करीब 183 किमी की दूरी पांच से छह घण्टे में तय की जा सकती है। सोनौली से भैरवहां, नारायणघाट होते मुंगलिंग और वहां से काठमाडू हाईवे पर पांच किमी का सफर तय कर मनोकामना पहुंचा जा सकता है।

पहाड़ियों पर मिलेंगी सभी सुविधाएं
मनोकामना मन्दिर पहुंचने के लिए आपको मनोकामना रोपवे स्टेशन से रोप-वे से सफर करना होगा, जो सुबह छह बजे से शाम पांच बजे तक चलता है। मनोकामना मन्दिर के पास पहाड़ी पर भी रहने खाने का उचित प्रबंध है। यहां साधारण होटल और रेस्टोरेंट उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त मनोकामना पहाड़ी के नीचे रोपवे स्टेशन के बाहर भी दर्जनों होटल व खान पान की दुकाने है। मनोकामना मन्दिर जाने के लिए साल के 12 महीनें उत्तम है।

परिवार के लिए होगा शानदार ट्रिप
या फिर यूं कहा जा सकता है कि कुल मिला कर परिवार के साथ छुट्टी बिताने का इससे बेहतर और कोई जगह नहीं हो सकती। आस्था और पर्यटन के बीच प्रकृति के मनोरम दृश्य को देखना है तो एक बार मनोकामना जरुर आयें।

(हर महत्पूर्ण खबर सबसे पहले पाने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वाइन करें और ट्विटर पर फॉलो करें.)