शहीद को दी गई अंतिम विदाई: सुबह भाई से फोन पर वादा किए थे नवीन, 7 जून को घर आकर साथ खरीदेंगे कार, शाम में आई शहीद होने की खबर

गोरखपुर: जम्मू—कश्मीर के श्रीनगर में हुए आतंकी हमले में शहीद गोरखपुर के लाल नवीन सिंह को गुरुवार को जिले के कालेसर मोक्षधाम पर नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान वहां मौजूद हर किसी ने शहीद को श्रद्धाजंलि दी। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए लोगों को भारी हजूम उमड़ पड़ा। बुधवार की रात करीब दो बजे शहीद का शव उनके गोरखपुर के सहजनवां भगवानपुर बरडाढ़ गांव में पहुंचा। सुबह यहां से ‘भारत माता की जय’ और ‘शहीद नवीन सिंह अमर रहें’ के नारे के बीच, शहीद के पार्थिव शरीर को सेना के वाहन में रखकर गांव से अंतिम यात्रा के लिए निकाला गया।

पिता ने दी शहीद को मुखाग्नि

शहीद के पिता जयप्रकाश सिंह ने अपने जवान बेटे को मुखाग्नि दी। हालांकि कोविड की वजह से सेना द्वारा शहीद को गार्ड आफ आनर सलामी नहीं दी जा सकी। सेना की ओर से बुधवार को ही यह कहा गया था कि शहीद का शव पहले कूड़ाघाट स्थित आर्मी हेडक्वार्टर आए और यहां सलामी देने के बाद अंतिम संस्कार के लिए भेजा जाए, लेकिन परिवार के लोग इसके लिए तैयार नहीं हुए। उनका पार्थिव शरीर देर रात उनके गांव भगवानपुर बरडाढ़ और यहीं से सुबह कालेसर मोक्षधाम पर ले जाकर अंतिम विदाई दी गई।

भाई व मां का दर्द देख रोने लगा पूरा गांव

देर रात शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। भाई विकास सिंह और मां उषा सिंह का का दर्द और चिख—पुकार सुन आसपास के हजारों लोग वहां इक्क्ठा हो गए। भाई विकास यह कह—कहकर रोने लगा कि सुबह नवीन से मेरी फोन पर बात हुई थी, उसने कहा था मैं 7 जून को गांव आ रहा हूं। फिर दोनों भाई चलकर कार खरीदेंगे। अब मैं अकेला कार कैसे खरीदूंगा नवीन…वहीं, मां उषा सिंह बिलखते हुए कह रही थी। नवीन तुमने वादा किया था, मकान बनवाने के लिए बैंक से ली गई लोन भी जल्दी चुका दोेगे, भाई की नौकरी भी लग जाएगी, फिर परिवार में सिर्फ खुशियां ही खुशियां होंगी। लेकिन तुमने तो सिर्फ दर्द दिया नवीन…सिर्फ दर्द। यह सबकुछ देख वहां मौजूद हर किसी का कलेजा फट गया। सभी की आंखें खुद को रोक नही पाई और छलक उठीं।

बड़ी बहन से था अधिक लगाव

शहीद के भाई विकास सिंह के मुताबिक परिवार में माता—पिता के अलावा बड़े भाई विकास ही हैं। अभी दोनों भाईयों की शादी नहीं हुई थी। वहीं दो बहने भी हैं। दोनों की शादी हो चुकी है। बड़ी बहन से नवीन को ज्यादा लगाव था। जबकि भाई के नौकरी को लेकर नवीन हमेशा चिंतित रहते थे। उन्होंने वादा किया था कि पहले तुम्हारी नौकरी लगेगी, फिर शादी। उसके बाद ही मैं भी शादी करूंगा। परिवार में पिता की पेंशन के अलावा कमाने वाले सिर्फ नवीन ही अकेले थे। गांव पर नवीन ने बैंक से लोन लेकर मकान बनवाया है। मां से उन्होंने कहा था कि जल्द ही आकर बैंक का लोन भी चुका दूंगा। उसके बाद भाई की शादी होगी और फिर मेरी। परिवार में सिर्फ खुशियां ही खुशियां होंगी। लेकिन किसी को क्या पता था कि यह खुशी कम मातम में बदल जाएगी।

इन लोगों ने दी श्रद्धाजंलि

इस दौरान सांसद रवि किशन, भाजपा के पदाधिकारी प्रदीप शुक्ला, यूपी सरकार के दर्जा प्राप्त मंत्री विभ्राट सिंह कौशिक, सीओ चौरीचौरा, एसडीएम सहजनवा, आर्मी के अधिकारियों सहित हजारों की संख्या में लोगों ने नम आंखों से शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धाजंलि अर्पित की।

आंतकी हमले में शहीद हुए थे नवीन

श्रीनगर में सोमवार को हुए आतंकी हमले में गोरखपुर के लाल कमांडो नवीन सिंह (23) शहीद हो गए। नवीन सोमवार को हुए इस हमले से पहले पहाड़ी पर राशन पहुंचाने जा रही सेना की गाड़ी पर सवार थे। गाड़ी पर आतंकवादियों ने श्रीनगर कुलगांव के पास हमला कर दिया। जिसमें गोरखपुर के कमांडो नवीन सिंह (23) शहीद हो गए। सिर और पैर में गोली लगने से उनकी मौत हुई।

सहजनवा के रहने वाले हैं शहीद नवीन

सोमवार की देर रात नवीन के शहीद होने की सूचना सीओ ने उनके परिवारीजनों को फोन पर दी। उसके बाद से घर में कोहराम मच गया। पोस्टमार्टम के बाद शहीद का शव गोरखपुर भेजा जा रहा है। यहां सहजनवा के भगवानपुर बरडाढ़ गांव के मूल निवासी जयप्रकाश सिंह एएससी सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद दरगहिया हनुमान मंदिर नंदानगर में मकान बनवाकर सपरिवार रहते हैं। उनके छोटे बेटे नवीन सिंह 9 आरआर स्पेशल फोर्स में कमांडो थे और डेढ़ साल से जम्मू श्रीनगर में तैनात थे।

दस दिन पहले मुठभेड़ में आतंकियों को ढेर किए थे नवीन

दस दिन पहले नवीन की कमांडो टीम ने एक ऑपरेशन में कुछ आतंकवादियों को मार गिराया था। सोमवार को नवीन अपनी टीम के साथ पहाड़ियों पर राशन पहुंचाने जा रहे थे। रास्ते में घात लगाकर बैठे आतंकवादियों ने काफिले पर फायर झोंक दिया। नवीन के सिर और पैर में गोली लगने से उनकी मौत हो गई। कमांड से पहली सूचना बड़े भाई विकास को नवीन के सीओ कर्नल पटेल ने दी जिसमें पैर में गोली लगने की बात कही। हालांकि दो घंटे बाद उनके शहीद होने की सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पिता जयप्रकाश सिंह, माता ऊषा सिंह बड़े भाई विकास सिंह व परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है। पड़ोस के लोग उन्हें ढांढस बंधा रहे हैं।