यूं ही नहीं धरती का स्वर्ग कहा जाता है पंचमढ़ी, यहीं अज्ञांतवास में महादेव ने गुजारे थे दिन

रिपोर्ट: रवि प्रताप सिंह

पंचमणि: देश के दिल कहे जाने वाले मध्यप्रदेश का इकलौता हिल स्टेशन पंचमढी, यूं तो अपनी प्राकृतिक सुन्दरता और सतपुड़ा के जंगलों के लिए जाना जाता है। यहां हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक आते है। जंगल और पहाडियों से घिरे पंचमढी में मानों चहुओर हरियाली बिखरी पड़ी हो। इन सबके बीच उंची पहाड़ियों पर से उतरती नदियां और झरनों के कल—कल से उठते मीठे स्वर पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यहां मौज, मस्ती और रोमांच के तमाम साधन संसाधन उपलब्ध होने के साथ इस स्थान का धार्मिक महत्व सैलानियों को और भी रास आता है।

कहा जाता है कि जब भगवान शिव भष्मासुर के तस्या से प्रसन्न होकर उसे आशिर्वाद दिया था, कि वह जिसके सर पर हाथ रख देगा वह भष्म हो जायेगा। भगवान शंकर से वरदान पाने के बाद उनके ​सिर पर ही हाथ रख उन्हें भष्म करने का प्रयास किया। इस दौरान भगवान शंकर भष्मासुर से बचने के लिए अज्ञांतवास चले गये। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपने अज्ञांतवास के दौरान भगवान शंकर सतपुडा की पहाडियों की गुफाओं में ही शरण ली थी। लोगों की मान्यता है कि भगवान शिव सबसे ज्यादा समय जटाशंकर स्थित गुफा में रहे थे।

इसके साथ ही यहां का पांडव गुफा भी महाभारत काल से जुड़ा है। मान्यता है कि पांडव वनवास के दौरान यहां रुके थे। यहां छोटी छोटी छह गुफायें है, पांच पांडवों की और एक द्रौपदी की। इसके अतिरिक्त यहां रजत प्रपात, सतपुडा टाईगर रिजर्व, प्रियदर्शी प्वाइंट, बी फाल, डिफेंस गोल्फ ग्राउंड और यहां का बाजार ही के प्रमुख आकर्षण है।

कैसे पहुंचे पंचमणि
पंचमढी मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले के पिपरियां तहसील में स्थित है। पिपरियां से पंचमढ़ी करीब 52 किमी दूर स्थित है और पिपरियां ही पंचमढ़ी का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन भी है। जो मुम्बई हावड़ा रेल मार्ग पर इटारसी और जबलपुर के बीच स्थित है। राजधानी भोपाल से करीब 205 किमी दूर पंचमढी, पर्यटन के साथ साथ आस्था का भी प्रमुख केन्द्र है। भोपाल ही इसका नजदीकी हवाई अड्डा है। इसके साथ ही सडक मार्ग से पिपरियां भोपाल के लगभग प्रमुख शहरों से जुडा है। पिपरियां पहुंच कर बस और टैक्सी के जरिये पंचमढी पहुंचा जा सकता है।

कैसा रहता है मौसम
पंचमढ़ी की सर्दी और सुहावने मौसम इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। सर्दियों के मौसम में यहां तापमान लगभग 4—3-4 C रहता है, लेकिन मई-जून के महीनों में जब मप्र के अन्‍य भागों में तापमान काफी अधिक होता है, तब पंचमढ़ी में 34 C से अधिक नहीं होता। इस कारण यहां गर्मियों में पर्यटकों की बहुत भीड़ होती है। सतपुड़ा के घने जंगलों से घिरा यह रमणीय स्थल इसके मौसम के कारण ही अपने आप में विशिष्ट है।

पंचमढी को ऐसे मिली नई पहचान
कहा जाता है कि पंचमढ़ी की खोज अंग्रेज अफ्सर केप्टन जे.फॉरसोथ ने की थी। उन्हें यहां सन् 1862 में, सतपुड़ा के इस भाग के अन्वेषण के लिए आये थे। उन्होंने यहां एक फॉरेस्ट लॉज का निर्माण किया। यहां से जाने के बाद वह द हाइलेंडस ऑफ सेंट्रल इंडिया नामक एक प्रसिद्ध पुस्तक भी लिखी, जिसमें सतपुड़ा पर्वत श्रेणी की उत्कृष्ट सुंदरता का सुखद चित्रण किया। जब वे पचमढ़ी आए तो इस क्षेत्र पर पंचमढ़ी के कोरकू जागीरदार का अधिकार था, किंतु हांडी खो के समीप मग्न झोपड़ियों के स्थलों के रूप में अति प्राचीन सभ्यता के चिन्ह विद्यमान थे।

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