सपा के निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष का टिकट कटा तो अपनाया बगवाती तेवर, सास को लड़ाया निर्दलीय, मिली जीत

गोरखपुर: समाजवादी पार्टी की अंतर्कलह जिला पंचायत के चुनाव में खुलकर सामने आ गई है। निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष गीतांजलि यादव का टिकट कटा तो परिवार ने बगावती तेवर अपना लिया। निवर्तमान अध्यक्ष ने अपनी चचेरी सास को चुनाव मैदान में उतारा तो सपा के कई दिग्गज उनकी मुखालफत करने क्षेत्र में पहुंच गए। फिर भी कोई फर्क नहीं पड़ा। निवर्तमान अध्यक्ष के परिवार ने एक सीट से तीसरी बार जीत हासिल की है।

सपा नेता मनुरोजन यादव कहते हैं कि निवर्तमान अध्यक्ष का टिकट उन्हीं लोगों के इशारे पर काटा गया था। सपा जिलाध्यक्ष से पूछा था कि जिस टिकट वितरण कमेटी में निवर्तमान अध्यक्ष खुद शामिल हैं उनका टिकट कैसे काट दिया गया। इस पर अध्यक्ष के पास कोई जवाब नहीं था।

 

सपा नेता मनुरोजन यादव का कहना है कि जब निवर्तमान अध्यक्ष का टिकट काट दिया गया तो मैंने अपनी चाची को लड़ाने का निर्णय लिया। जब नामांकन हो गया और वह चुनाव अभियान में जुट गए तो सपा के कई बड़े नेता विरोध में प्रचार करने पहुंच गए।

एक तरफ कहा गया कि सपा वहां किसी को लड़ा नहीं रही है तो दूसरी तरफ एक प्रत्याशी के प्रचार और उसके कार्यालय के उद्घाटन के लिए कई नेता गए। इसके बावजूद क्षेत्र की जनता ने बताया कि असली सपाई कौन है?

छत्तीस का आंकड़ा छह साल पुराना

गीतांजलि यादव और सपा के कुछ नेताओं के बीच छत्तीस का आंकड़ा नया नहीं, छह साल पुराना है। इसकी बुनियाद 2015 के जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में पड़ गई थी। उस समय प्रदेश में सपा की सरकार थी। अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। तब कुछ नेताओं ने तत्कालीन भाजपा विधायक विजय बहादुर यादव का नाम लिया और बताया कि वह सपा के करीब आ गए हैं।

 

विजय के भाई अजय बहादुर को अध्यक्ष बनाया जा सकता है। इस पर अखिलेश यादव ने स्पष्ट कहा कि मनुरोजन की पत्नी चुनाव लड़ेंगी, चाहे जीतें या हारें। इस घोषणा के बाद भी विजय बहादुर यादव ने अपने भाई को चुनाव मैदान में उतार दिया। कई सपा नेताओं ने उस समय विजय बहादुर का खुल कर साथ दिया। चुनाव में गीतांजलि जीत गईं। बाद में विजय बहादुर भी सपा के करीबी हो गए पर पार्टी के कुछ नेता दो खेमों में बंट गए।