अत्याधुनिक उपकरणों से लैस हुए गोरखपुर मंडल के वनकर्मी…..

गोरखपुर: वनकर्मियों को ड्यूटी के दौरान जंगली जानवरों के हमले का खतरा बना रहता है। मिसाल के तौर पर, कुशीनगर एवं महराजगंज जिले के बार्डर पर गत दिवस मानव-वन्यजीव संघर्ष में गोरखपुर वन प्रभाग के वन दरोगा महेंद्र सिंह समेत कुशीनगर वन प्रभाग के कर्मचारी भी तेंदुए के हमले में जख्मी हो गए थे।

गोरखपुर और आसपास के वन क्षेत्र में निरंतर बढ़ती ऐसे मामलों से निपटने अब गोरखपुर वन प्रभाग समर्थ हो चला है। सोमवार को गोरखपुर वन प्रभाग को 20 की संख्या में खास हेलमेट और 10 की संख्या में हाफ बाडी सेफ्टी शिल्ड भी उपलब्ध हो गई।

 

यह भी पढ़े…..

मनुरोजन यादव: छात्र राजनीति से लेकर पूर्वांचल की राजनीति में बनाई अपनी एक अलग पहचान

गोरखपुर मण्डल में मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थितियों को देखते हुए गोरखपुर वन प्रभाग के डीएफओ अविनाश कुमार के मॉडल एक मॉडल रेस्कयू कार्ययोजना बनाई थी। जिसे पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ पवन कुमार शर्मा ने अत्याधुनिक तकनीक से वनों की सुरक्षा एवं मानव वन्यजीव संघर्ष के मद्देनजर प्रदेश के अन्य जिलों को भी अपनाने के निर्देश दिए थे।

इसी निर्देश के अनुपालन में तकरीबन 17 लाख रुपये की लागत से गोरखपुर वन प्रभाग ने अपने कर्मियों को ज्यादा समर्थ और प्रभावी बनाने के लिए कई जरूरी कदम उठाएं हैं।

जिसमे, तेंदुए को पकड़ने के लिए रिमोट सेंसिंग वाले पॉली कार्बोनेट के पिंजड़े खरीदे गए हैं। लोहे से ज्यादा मजबूत इन पिजड़ों का रख-रखाव सहज है, वहीं इन्हें कभी ले जाना भी आसान है। सिर्फ 70 किलोग्राम वजन के पिजड़ों पर न जंगल लगता है न स्क्रेच। इनमें कैमरे भी लगे हैं।

इसके अलावा कर्मियों को स्मार्ट स्टिक भी उपलब्ध कराई गई है जिससे सामने खड़े व्यक्ति या जानवर को स्पर्श करने पर उसे बिजली का हल्का झटका दे सकते हैं। स्टिक में पैनिक बटन, लेजर लाइट, टार्च और मोबाइल चार्जिंग का आप्शन इसे बहु उपयोगी बनाता है। जंगल की गतिविधियों एवं वन्यजीव की निगरानी के लिए कैमरा ट्रैप और स्टिल्थ कैमरा खरीदा गया है।

‘‘ वनों की सुरक्षा एवं बढ़ते मानव-वन्यजीव द्वंद को रोकने के लिए वन कर्मियों की सुरक्षा की भी चिंता करनी होगी। इस कड़ी में अत्याधुनिक सुरक्षा एवं सहयोगी उपकरण वनकर्मियों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ताकि वे अपनी ड्यूटी को ज्यादा मुस्तैदी और सुरक्षित ढंग से अंजाम दे सके।’’

-अविनाश कुमार, डीएफओ

 

 

वन कर्मियों के जान की चिंता

वन तस्करों एवं वन्यजीव के पूर्व में किए गए जानलेवा हमलों को ध्यान में रखते हुए प्रोटेक्टिव शिल्ड और लाइफ स्ट्रा बाटल भी दी गई है। हल्की लेकिन इफेक्टिव प्रोटेक्टिव शिल्ड से लैस वन सुरक्षाकर्मी किसी हमले से बचाव में समर्थ होते हैं। वहीं, लाइफ स्ट्रा बाटल से कैसा भी पानी भर कर पी सकते हैं। सुरक्षा में ड्रोन कैमरे और 8 सीटर स्टीमर भी खरीदी गई है। जंगल में मोबाइल नेटवर्क की समस्या को देखते हुए 5 किमी के रेंज का वॉकी-टॉकी, हैंडकफ्स एवं जाल (नेट) भी खरीदा गया है।

इन सभी उपकरणों का प्रयोग वनकर्मियो की कार्य प्रणाली को बेहतर बनाने में मदद करेगा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के साथ ही तस्करों से निपटने में सहायता प्रदान करेगा।